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Showing posts from April, 2020

हनुमानजी की पूजा कैसे किस प्रकार करनी चाहिए ?

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हनुमानजी की पूजा कैसे किस प्रकार करनी चाहिए ? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसी मान्‍यता है कि मंगलवार का व्रत करने वालों की कुंडली में मंगल ग्रह निर्बल होने ने के चलते होने वाले कष्‍ट दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्‍ति होती है। इस दिन हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी की असीम कृपा मिलती है। इसके अतिरिक्‍त मंगलवार का व्रत सम्मान, बल, साहस और पुरुषार्थ में भी वृद्धि करता है। सुयोग्‍य संतान प्राप्ति के लिए भी है यह व्रत बहुत लाभकारी माना जाता है। साथ ही इस व्रत के फलस्वरूप पापों से मुक्ति मिलती है और भय, भूत-प्रेत की बाधा और, काली शक्तियों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए भी ये व्रत करने की सलाह दी जाती है। मंगलवार को हनुमान जी को प्रसन्‍न करने के लिए व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें। फिर घर के ईशान कोण में किसी एकांत स्‍थान पर हनुमानजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। लाल वस्‍त्र पहनें और हाथ में जल ले कर व्रत का संकल्प करें। अब केसरीनंदन के सामने घी का दीपक जलाएं और फूल माला या फूल चढ़ाएं। रुई में चमेली के तेल लेकर उनके सामने रखें या हल्‍के से छीटे डाल दें।

चेहरा साफ़ करने के ज्योतिषीय उपाय: Expectations vs. Reality

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चेहरा साफ़ करने के ज्योतिषीय उपाय चेहरे को अच्छी तरह से साफ़ करने के लिए केवल पानी ही काफी नहीं होता है। बल्कि इसके लिए आपको समय-समय पर स्क्रबिंग और क्लींजिंग करते रहना चाहिए।  कई लोग चेहरे पर अलग-अलग तरह के क्रीम आदि का प्रयोग करते रहते हैं ,जबकि यह बेहद गलत आदत होती है। यदि आपके चेहरे पर एक क्रीम सूट कर जाये तो आप कोशिश करें कि उसका ही इस्तेमाल नियमित तौर पर किया जाये। अन्यथा  जो क्रीम आप बाजार से लेकर उपयोग करते है उसमे  कई प्रकार के खतरनाक रसायन भी पाए जाते है जो चेहरे  को साफ तो करते है साथ ही उन्हें नुकसान पहुंचा ते  हैं  इसलिए हमे चाहिए की हम ऐसे क्रीम का उपयोग करें जो नेचुरल पदार्थों से निर्मित है उसमे किसी भी तरह के रसायन का उपयोग न किया गया हो।   ज्योतिषीय उपाय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की जन्म कुंडली में लग्न को यानि पहले भाव को शारीरिक रचना की नींव मानते हैं। लग्न भाव को तनु यानि शरीर का भाव भी कहते हैं। जातक की शारीरिक रचना का पता भी प्रथम यानि लग्न भाव के आधार पर ही चलता है। लग्न भाव का स्वामी जातक के शरीर की त्वचा, रंग, आकर्षण आदि का सूचक होता है।

The Next Big Thing in ज्योतिषशास्त्र के अनुसार धन प्राप्त करने के उपाय

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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार  धन प्राप्त करने के उपाय ज्योतिषशास्त्र में फंसा हुआ धन प्राप्त करने के उपाय के तहत विस्तृत उल्लेख है। परंतु इससे पहले आपको ज़रुरी बिंदुओं को बताना आवश्यक हैं। यदि आपकी कुंडली में गुरु एवं शुक्र ग्रह मज़बूत हैं तो आपके रुके हुए धन के वापस आने के योग हैं। इसके विपरीत यदि कुंडली में मंगल, शनि एवं राहु अशुभ हों तो, आपको धन हानि होगी। कुंडली में दशम भाव हमारे कर्म का और नवम भाव भाग्य का होता है। वहीं ग्यारहवां भाव लाभ का और दूसरा भाव हमारे द्वारा कमाए गए धन का होता है। जन्म कुंडली में छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी कुंडली में हावी हों तो धन हानि, क़र्ज़ और धन चोरी का सामना करना पड़ता है इसलिए किसी भी ज्योतिषीय उपाय को आजमाने से पूर्व किसी ज्योतिषशास्त्र  के जानकार को अवश्य दिखाएं। धन वापस पाने के ज्योतिषीय उपाय कुंडली में शुक्र व गुरु  को मज़बूत करें कुंडली में द्वितीय, नवम, दशम एवं एकादश भाव एवं इनके भावेशों को मज़बूत करें कुडली में शनि ,राहु  एवं मंगल   यदि बुरे भाव में हैं तो उनकी शांति का उपाय करें पितृदोष निवारण के उपाय  करें पूर्

सरकारी नौकरी के उपाय: Do You Really Need It? This Will Help You Decide!

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सरकारी नौकरी के उपाय भगवान शंकर का पूजन करें-  मनचाही जॉब पाने के लिए भगवान शिव की आराधना करना चाहिए। हर सोमवार शिव जी के मंदिर में जाकर कच्चा दूध, साबुत चावल (जो टूटे हुए न हों) अर्पित करें और भोलेनाथ से अपने मन की बात कहें। ऐसा करने से आपकी नौकरी में आने वाली सारी मुसीबतें दूर हो जाएंगी। भगवान शिव का पूजन नौकरी पाने का अहम उपाय है। भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए करें पारद शिवलिंग की पूजा बजरंग बली को करें प्रसन्न-  अच्छी नौकरी पाने के लिए घर में हनुमान जी की हवा में उड़ती हुई तस्वीर लगाएं। इसके साथ ही मंगलवार के दिन श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। किसी भी माह के मंगलवार से शुरू करते हुए 40 दिनों तक रोजाना नंगे पैर बजरंगबली के मंदिर में जाएं और उन्हें लाल गुलाब अर्पित करें। हनुमान यंत्र की स्थापना से प्रसन्न होंगे बजरंग बली: हनुमान मंत्र  गणपति जी की करें आराधना-  नौकरी के उपाय के संबंध में किसी भी चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर में लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई हो। इसके साथ ही विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना करें। उनके समक्ष लौंग

वास्तुशास्त्र, तथा राशि के अनुसार कौन सा पौधा किस दिशा में लगाना चाहिए |

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     वास्तुशास्त्र के अनुसार पौधे और वृक्ष कहाँ और किस दिशा में लगाना चाहिए |   1.  तुलसी और केले के पेड़ को ईशान या उत्तर में लगाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।  2. घर के पूर्व में बरगद, पश्चिम में पीपल , उत्तर में पाकड़ और दक्षिण में गूलर का वृक्ष शुभ होता है किंतु ये घर की सीमा में नहीं होना चाहिए। 3.  घर के उत्तर एवं पूर्व क्षेत्र में कम ऊंचाई के पौधे लगाने चाहिए। पौधारोपण उत्तरा,स्वाति, हस्त, रोहिणी एवं मूल नक्षत्रों में करना चाहिए। ऐसा करने पर रोपण निष्फल नहीं होता। 4.  घर के दक्षिण एवं पश्चिम क्षेत्र में ऊंचे वृक्ष (नारियल अशोकादि) लगाने चाहिए शुभता बढ़ती है। 5.  जिस घर की सीमा में निगुंडी का पौधा होता है वहां गृह कलह नहीं होती। 6.  जिस घर में एक बिल्व का वृक्ष लगा होता है उस घर में लक्ष्मी का वास बतलाया गया है। 7.  जिस व्यक्ति को उत्तम संतान एवं सुख देने वाले पुत्र की कामना हो, उसे पलाश का पेड़ लगाना चाहिए। 8.  जिस व्यक्ति को संकटों से मुक्ति पाना और निरोगी रहना हो उसे घर के दक्षिण में नीम का वृक्ष

Interesting Facts I Bet You Never Knew About रुद्राभिषेक कैसे करें?

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||  रुद्राभिषेक मंत्र   | | रुद्राभिषेक मंत्र से भगवान शिव की पूजा रुद्राभिषेक अर्थात रुद्र का अभिषेक। रूद्र जिन्हे  भगवान शिव का अभिषेक अर्थात भगवान शंकर को शिवलिंग पर जल अर्पण किया जाता है तो उसे रुद्राभिषेक की कहते हैं। रुद्राभिषेक मंत्र ( Rudrabhishek Mantra ) द्वारा किया जाने वाला यह प्रयोग एक शक्तिशाली ऊर्जापूर्ण कार्य है, जिसकी वजह से भगवान शिव की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। रुद्राभिषेक मंत्रों द्वारा किया जाता है और  रुद्राभिषेक मंत्र कोई एक मंत्र नहीं बल्कि कई  मंत्रों का समूह है, जिसे  'शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी' के नाम से भी जाना जाता है। इसे केवल 'रुद्राष्टाध्यायी' भी कहते हैं और “रुद्री पाठ” के नाम से भी जाना जाता है।  रुद्राभिषेक मंत्र की विशेषता:- रुद्राभिषेक मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे आसान और अचूक उपाय है क्योंकि इसके पाठ करने से भगवान शिव साधक को सभी प्रकार की  सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण बनाते हैं और जितनी भी समस्याएं उसके जीवन में आ रही है , उन सभी समस्याओं का मूल सहित अंत हो जाता है। अर्थात भगवान शिव की कृपा को शीघ्र प